Saturday, October 22, 2011

hak se majboot hote haath

किसी कवि ने नारी के लिए कहा है "नारी तुम्हारी न कोई कामना न भावना,न कोई प्रतिक्रिया".
हमारे देश की आधी आबादी नारी है जो अपने हक़ को तरसती थी.घर में जन्म से ले कर सारी जिन्दगी.लेकिन आज स्थिति बदली है जब महिला अपने हक़ के लिए खड़ी हुई तो कई क़ानून बने जिनसे महिलाओं के हाथ मजबूत हुए .पुराने कानून में बदलाव किये जा रहे हैं.इनमे से कई क़ानून हैं जेसे-
१-घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम २००५-इस के तहत सभी अपराध गैर जमानती हैं .यह कानून पीडिता को मकान में रहने,अपनी तथा बच्चो की सुरक्षा, गुजारा भत्ता आदि के लिए सहायता करता है
२गोद लेने सम्बन्धी कानून (संशोधन २०१०)इस में महिला भी किसी बच्चे को गोद ले कर उसकी अभिभावक बन सकती है.
३-ऑफिस में सुरक्षा-इस विधेयक २०१० में ऑफिस में होने वाली यौन उत्पीडन से सुरक्षा मिलेगी.
देश में इसके आलावा भी बहुत से कानून हैं जो महिलाओ के मददगार है जरूरत है तो बस सही व पूरी जानकारी की तथा थोड़ी सी हिम्मत की जो हर नारी को अपना आत्मसम्मान बनाये रखने के लिए जरूरी है 1

Friday, October 21, 2011

nafasati andaaj

बंद मुट्ठी में दुबका अरमानो का पंछी
भरना चाहता है परवाज(उड़ान) अब खुले आसमान  में.
                                        २
नामुमकिन को  मुमकिन 
जो बना सकता है
मुझसे तू बस उसी जूनून की बात कर
                                      ३
में अदा हूँ वादे वफ़ा हूँ
में हया हूँ,मीठी सी सदा हूँ
                                      ४पत्थर भी पिघलते हैं इरादे  गर पक्के हो
मंजिल चूमती है कदम गर वादे दिल ke सच्चे ho

fursatnama

मनोवैज्ञानिक फ्रायड   ने चेतन मन और अचेतन मन की दो अवस्थाए बताई थी.कभी कभी अचेतन मन चेतन मन पर इतना हावी हो जाता है की यक्ति का जीवन ही हास्यास्पद  हो जाता है .अभी कुछ समय पहलेआई जी पंड्या ने भी सिन्दूर बिच्चुए और बिंदी लगा कर राधा रूप रख लिया था .उनका कहना था की सपने में कृष्ण ने उन्हें राधा बन ने को कहा है.लेकिन सोचने वाली बात ये है की एसा क्यों होता है.शायद ये सोच की औरत के लिए समाज का रवैया थोडा नर्म होता है या मीडिया को रिझा कर लोकप्रियता पाने का.औरत के रूप में मर्द के बारे में राइ इन्ही के शब्दों में 
बोब्बी डार्लिंग के शब्दों में हर मर्द में एक औरत होती है यदि एसा न हो तो वो भावुक नहीं हो सकता.मैने औरत हो कर ही जिंदगी को करीब से जाना है. 
इन औरतो रुपी मर्दों के पास अपने पक्ष में बहुत सरे तर्क हैं वे विष्णु भगवान् के मोहिनी रूप से ले कर अमिताभ बच्चन गोविंदा और कमल हसन की ऐसी दुहाई देते हैं की हाँ में हाँ मिलनी ही पड़ती है
           लेकिन सवाल अब भी वाही अनुत्तरित "आखिर मर्द में औरत बस्ती ही क्यों है"
अब कभी किसी औरत की खूबसूरती की तारीफ़ करे तो जरा ध्यान से कही वो कमला की जगह कमल न निकले 

Thursday, October 20, 2011

jid ka sankalp

कहते हैं नारी या त्रिया हट के आगे भगवान् भी हारा है.इसी हट ने राम जी को वनवास दिलाया. जाहिर है समाज में त्रिया हट को उदार नजरो से नहीं देखा जाता.लेकिन सच  कुछ और है.जब अन्ना हजारे ने अनशन किया तो unke साथ कई स्त्रिया भी थी जिन्होंने अनशन में भाग लिया .लगा वक्त बदल रहा है.और उन्हें भी भ्रष्ट व्यवस्था से परेशानी है.लेकिन अन्ना जी पग पग पर सांस की तरह चलने वाले भ्रष्टाचार को केसे रोक पायेगे.उसको रोकेगी त्रिया हट.आज तक त्रिया हट को दूसरो का नुक्सान पहुचाते ही सुना है लेकिन यदि यही हट वो अपने पति को इमानदारी से पैसा कमाने के लिए प्रेरित करने में प्रयोग करे तो निश्चित रूप से भ्रष्टाचार कम हो सकता है.
                              क्या हम स्त्रिओ ने कभी ये सोचा है की अधिकारी पति की तनखा के आलावा पैसा कहाँ से आ रहा है.क्या फरमाइश करते समय ये ध्यान रखना जरूरी नहीं की इसके लिए पैसा कहा से आएगा.हम औरते व्यर्थ बदनाम नहीं हैं.मेरी एक सहेली के पति इन्जीनीर हैं जो साईट पे जाते है.यानि सड़क पुल आदि बनवाते हैं.उनकी पत्नी यानि मेरी सहेली को इस बात से बड़ी कोफ़्त है की उनका पति कभी एक दो तसले बाल्टी तक नहीं लाता जो फ्री की होती है उनकी नजर में सरकारी यानि फ्री.
                              अब माताए अपने रिश्वती बेटे पे थूकती नहीं गर्वित होती हैं.कर्वाचोथी पत्निया अपने पति की काली कमाई में की गयी अनाप शनाप शोपिंग से खुश रहती हैं.नतीजा सामने हे.इसी तरह की माओ की कोख से ए राजा,कलमाड़ी जेसे पुत्रो ने जनम लिया.जिन्होंने  ममता को लज्जित किया.कवि दिनकर ने लिखा था जो तटस्थ  हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध.तो फिर यहाँ तो पूरा योगदान है
                   अब वक्त आ गया है की त्रिया अपने हट को सत्याग्रह साबित करे.लेकिन ये सत्याग्रह किसी भ्रष्टाचारी के बस की बात नहीं.इसके लिए हमें अपनी सोच बदल कर एक नयी शुरुवात करनी होगी.इस सोच के साथ शुरुवात  करनी होगी की
                                हम बद्लेगे तो युग बदलेगा 

jindgi kya hai

जिन्दगी  क्या है
कुछ समझ में आता नहीं
निकल गया जो हाथ  से वो  वक्त लौट पाता नहीं
यु तो मुस्कराहट नजर आती है हर शख्स के चेहरे पे यहाँ
दिल में छिपे हैं कितने खंजर ये कोई दिखलाता नहीं
बह रहे हैं कारवां के संग संग हम भी सनम
जायेगे पर hum कहाँ ये कोई बतलाता नहीं

Monday, October 17, 2011

dekho hans n dena

एक बार एक गुफा में जंगल का राजा शेर और शेरनी आराम कर रहे थे की तभी एक बन्दर ने बाहर से शेर को ललकारा 
"बाहर निकल कायर देख तेरी केसी मार लगाता हूँ"
लेकिन शेर ने अनसुनी कर दी 
बन्दर फिर चिल्लाया क्यों  डर गया निकल बाहर
शेरनी को बहुत गुस्सा आया वो बोलीदेखो  दो टके का आपको ललकार रहा है और आप चुप हो 
शेर बोला "जाने दे बच्चा है"
बन्दर ने फिर ललकारा "देख तेरी कैसी  चटनी बनाता   हूँ निकल बाहर"
इस बार शेरनी को बहुत गुस्सा आया बोली शायद बन्दर ठीक कह रहा है तुम डरपोक कायर हो लेकिन में नहीं हूँ लाओ में देखती हूँ इस बन्दर को
शेर ने बहुत समझाया पर शेरनी नहीं मानी गुफा से बाहर निकल कर दहाड़ लगायी 
उसको देखते ही बन्दर भागा आगे आगे बन्दर पीछे पीछे शेरनी तबी बन्दर तेजी से पेड़ की एक छोटे से खोह(पेड़ के बीच बना एक छोटा रास्ता)से निकल गया शेरनी उसके पीछे थी वो भी उसी खोह में से निकली लेकिन उसका मुह उस खोह में फंस गया.बस बन्दर ने ये देखते ही डंडा लेकर शेरनी की खूब pitai की
शेरनी लंगडाती हुई गुफा में आई और शेर से बोली अरे वो बन्दर ने तो मुझे बहुत मारा
शेर बोला"में तभी तो मना कर रहा था क्योकि में भी कई बार उसकी इसी तरह मार खा चुका हूँ........

naari ke poorvagrah se grasit purush samaj

अभी बीते फरवरी की बात है मेरे एक मित्र इंडिगो airlines की फ्लाईट में यात्रा कर रहे थे.हवाई जहाज उड़ने वाला ही था कि एक यात्री ने हल्ला मचाना शुरू कर दिया उनका कहना था कि वे महिला piolet  के साथ नहीं उड़ेगे.और मूर्खता कि पराकाष्ठा   यह कि  उसने चालीस minut तक प्लेन को रोक कर रखा.इस से यात्रिओ को बहुत परेशानी हुई.जब किसी भी तरह वो मन ने को तैयार नहीं हुए तो उनसे पूछा गया कि आपको महिला पाइलेट से क्या परेशानी है तो उन्होंने कहा बस महिला पर उन्हें विश्वास नहीं.वे कतई मान ने को तैयार नहीं थे कि महिला piolet भी कुशल हो सकती हैं.उन कि तथा उन जैसी मानसिकता वाले पुरुषो कि बुद्धि पर सिर्फ तरस ही खाया jaa सकता है.
   इन तथाकथित बुद्धिजीवियों से पूछा जाये कि आज नारी किस बात में पुरुषो से कम है चाहे कोई भी वक्त रहा हो एसा कोई काम कभी भी संज्ञान में नहीं आया जहाँ महिला पुरुष से कम रही हो.लेकिन फिर भी पुरुष प्रधान समाज में उसकी काबिलियत को कम आँका जाता रहा है.और जब भी वो कोई ख़ास काम करने लगती है या कोशिश भी करती है तो एसा हंगामा मचाया जाता है जेसे कोई आसमान फट गया हो..
फिर से उक्त घटना पर नजर की जाये और उन महाशय से पूछा जाये की जहाज उड़ने के लिए दमखम की नहीं बुद्धि की जरूरत होती है.और पुरुष तो पी कर भी आ सकता है जबकि महिला  एसा कभी नहीं करेगी .इस लिए महिला अधिक विश्वसनीय भी हुई.इस  पुरुष को तो हवाई जहाज से बाहर फेंक देना चाहिए जो तुलसी दास के इस कथन  की प्रशंसा करता है "ढोल गंवार शूद्र पशु नारी,सकल ताड़ना के अधिकारी".असल में उसको तो अयोध्या में ही कही फेंक दे वही रहे और पूजे उस राम को जिसने अपनी गर्भ वती पत्नी को धोखे से घर से निकाल दिया था.