जिन्दगी क्या है
कुछ समझ में आता नहीं
निकल गया जो हाथ से वो वक्त लौट पाता नहीं
यु तो मुस्कराहट नजर आती है हर शख्स के चेहरे पे यहाँ
दिल में छिपे हैं कितने खंजर ये कोई दिखलाता नहीं
बह रहे हैं कारवां के संग संग हम भी सनम
जायेगे पर hum कहाँ ये कोई बतलाता नहीं
कुछ समझ में आता नहीं
निकल गया जो हाथ से वो वक्त लौट पाता नहीं
यु तो मुस्कराहट नजर आती है हर शख्स के चेहरे पे यहाँ
दिल में छिपे हैं कितने खंजर ये कोई दिखलाता नहीं
बह रहे हैं कारवां के संग संग हम भी सनम
जायेगे पर hum कहाँ ये कोई बतलाता नहीं
No comments:
Post a Comment