मनोवैज्ञानिक फ्रायड ने चेतन मन और अचेतन मन की दो अवस्थाए बताई थी.कभी कभी अचेतन मन चेतन मन पर इतना हावी हो जाता है की यक्ति का जीवन ही हास्यास्पद हो जाता है .अभी कुछ समय पहलेआई जी पंड्या ने भी सिन्दूर बिच्चुए और बिंदी लगा कर राधा रूप रख लिया था .उनका कहना था की सपने में कृष्ण ने उन्हें राधा बन ने को कहा है.लेकिन सोचने वाली बात ये है की एसा क्यों होता है.शायद ये सोच की औरत के लिए समाज का रवैया थोडा नर्म होता है या मीडिया को रिझा कर लोकप्रियता पाने का.औरत के रूप में मर्द के बारे में राइ इन्ही के शब्दों में
बोब्बी डार्लिंग के शब्दों में हर मर्द में एक औरत होती है यदि एसा न हो तो वो भावुक नहीं हो सकता.मैने औरत हो कर ही जिंदगी को करीब से जाना है.
इन औरतो रुपी मर्दों के पास अपने पक्ष में बहुत सरे तर्क हैं वे विष्णु भगवान् के मोहिनी रूप से ले कर अमिताभ बच्चन गोविंदा और कमल हसन की ऐसी दुहाई देते हैं की हाँ में हाँ मिलनी ही पड़ती है
लेकिन सवाल अब भी वाही अनुत्तरित "आखिर मर्द में औरत बस्ती ही क्यों है"
अब कभी किसी औरत की खूबसूरती की तारीफ़ करे तो जरा ध्यान से कही वो कमला की जगह कमल न निकले

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