किसी कवि ने नारी के लिए कहा है "नारी तुम्हारी न कोई कामना न भावना,न कोई प्रतिक्रिया".
हमारे देश की आधी आबादी नारी है जो अपने हक़ को तरसती थी.घर में जन्म से ले कर सारी जिन्दगी.लेकिन आज स्थिति बदली है जब महिला अपने हक़ के लिए खड़ी हुई तो कई क़ानून बने जिनसे महिलाओं के हाथ मजबूत हुए .पुराने कानून में बदलाव किये जा रहे हैं.इनमे से कई क़ानून हैं जेसे-
१-घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम २००५-इस के तहत सभी अपराध गैर जमानती हैं .यह कानून पीडिता को मकान में रहने,अपनी तथा बच्चो की सुरक्षा, गुजारा भत्ता आदि के लिए सहायता करता है
२गोद लेने सम्बन्धी कानून (संशोधन २०१०)इस में महिला भी किसी बच्चे को गोद ले कर उसकी अभिभावक बन सकती है.
३-ऑफिस में सुरक्षा-इस विधेयक २०१० में ऑफिस में होने वाली यौन उत्पीडन से सुरक्षा मिलेगी.
देश में इसके आलावा भी बहुत से कानून हैं जो महिलाओ के मददगार है जरूरत है तो बस सही व पूरी जानकारी की तथा थोड़ी सी हिम्मत की जो हर नारी को अपना आत्मसम्मान बनाये रखने के लिए जरूरी है 1


