Thursday, October 20, 2011

jid ka sankalp

कहते हैं नारी या त्रिया हट के आगे भगवान् भी हारा है.इसी हट ने राम जी को वनवास दिलाया. जाहिर है समाज में त्रिया हट को उदार नजरो से नहीं देखा जाता.लेकिन सच  कुछ और है.जब अन्ना हजारे ने अनशन किया तो unke साथ कई स्त्रिया भी थी जिन्होंने अनशन में भाग लिया .लगा वक्त बदल रहा है.और उन्हें भी भ्रष्ट व्यवस्था से परेशानी है.लेकिन अन्ना जी पग पग पर सांस की तरह चलने वाले भ्रष्टाचार को केसे रोक पायेगे.उसको रोकेगी त्रिया हट.आज तक त्रिया हट को दूसरो का नुक्सान पहुचाते ही सुना है लेकिन यदि यही हट वो अपने पति को इमानदारी से पैसा कमाने के लिए प्रेरित करने में प्रयोग करे तो निश्चित रूप से भ्रष्टाचार कम हो सकता है.
                              क्या हम स्त्रिओ ने कभी ये सोचा है की अधिकारी पति की तनखा के आलावा पैसा कहाँ से आ रहा है.क्या फरमाइश करते समय ये ध्यान रखना जरूरी नहीं की इसके लिए पैसा कहा से आएगा.हम औरते व्यर्थ बदनाम नहीं हैं.मेरी एक सहेली के पति इन्जीनीर हैं जो साईट पे जाते है.यानि सड़क पुल आदि बनवाते हैं.उनकी पत्नी यानि मेरी सहेली को इस बात से बड़ी कोफ़्त है की उनका पति कभी एक दो तसले बाल्टी तक नहीं लाता जो फ्री की होती है उनकी नजर में सरकारी यानि फ्री.
                              अब माताए अपने रिश्वती बेटे पे थूकती नहीं गर्वित होती हैं.कर्वाचोथी पत्निया अपने पति की काली कमाई में की गयी अनाप शनाप शोपिंग से खुश रहती हैं.नतीजा सामने हे.इसी तरह की माओ की कोख से ए राजा,कलमाड़ी जेसे पुत्रो ने जनम लिया.जिन्होंने  ममता को लज्जित किया.कवि दिनकर ने लिखा था जो तटस्थ  हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध.तो फिर यहाँ तो पूरा योगदान है
                   अब वक्त आ गया है की त्रिया अपने हट को सत्याग्रह साबित करे.लेकिन ये सत्याग्रह किसी भ्रष्टाचारी के बस की बात नहीं.इसके लिए हमें अपनी सोच बदल कर एक नयी शुरुवात करनी होगी.इस सोच के साथ शुरुवात  करनी होगी की
                                हम बद्लेगे तो युग बदलेगा 

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