Monday, October 17, 2011

naari ke poorvagrah se grasit purush samaj

अभी बीते फरवरी की बात है मेरे एक मित्र इंडिगो airlines की फ्लाईट में यात्रा कर रहे थे.हवाई जहाज उड़ने वाला ही था कि एक यात्री ने हल्ला मचाना शुरू कर दिया उनका कहना था कि वे महिला piolet  के साथ नहीं उड़ेगे.और मूर्खता कि पराकाष्ठा   यह कि  उसने चालीस minut तक प्लेन को रोक कर रखा.इस से यात्रिओ को बहुत परेशानी हुई.जब किसी भी तरह वो मन ने को तैयार नहीं हुए तो उनसे पूछा गया कि आपको महिला पाइलेट से क्या परेशानी है तो उन्होंने कहा बस महिला पर उन्हें विश्वास नहीं.वे कतई मान ने को तैयार नहीं थे कि महिला piolet भी कुशल हो सकती हैं.उन कि तथा उन जैसी मानसिकता वाले पुरुषो कि बुद्धि पर सिर्फ तरस ही खाया jaa सकता है.
   इन तथाकथित बुद्धिजीवियों से पूछा जाये कि आज नारी किस बात में पुरुषो से कम है चाहे कोई भी वक्त रहा हो एसा कोई काम कभी भी संज्ञान में नहीं आया जहाँ महिला पुरुष से कम रही हो.लेकिन फिर भी पुरुष प्रधान समाज में उसकी काबिलियत को कम आँका जाता रहा है.और जब भी वो कोई ख़ास काम करने लगती है या कोशिश भी करती है तो एसा हंगामा मचाया जाता है जेसे कोई आसमान फट गया हो..
फिर से उक्त घटना पर नजर की जाये और उन महाशय से पूछा जाये की जहाज उड़ने के लिए दमखम की नहीं बुद्धि की जरूरत होती है.और पुरुष तो पी कर भी आ सकता है जबकि महिला  एसा कभी नहीं करेगी .इस लिए महिला अधिक विश्वसनीय भी हुई.इस  पुरुष को तो हवाई जहाज से बाहर फेंक देना चाहिए जो तुलसी दास के इस कथन  की प्रशंसा करता है "ढोल गंवार शूद्र पशु नारी,सकल ताड़ना के अधिकारी".असल में उसको तो अयोध्या में ही कही फेंक दे वही रहे और पूजे उस राम को जिसने अपनी गर्भ वती पत्नी को धोखे से घर से निकाल दिया था.

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